Wednesday, July 15, 2026
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भारतीय फिल्म Period: End of sentence को मिला अवॉर्ड, जानें क्या है कहानी?

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के काठी खेड़ा गांव की रहने वाली युवती स्नेह पर बनी लघु फिल्म ‘पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस’ को ऑस्कर पुरस्कार मिला है। इसकी घोषणा हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में रविवार देर को आयोजित 91वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में की गई।

दरअसल, भारतीय फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा की फिल्म ‘पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस’ को बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट कैटिगरी फिल्म के ऑस्कर अवॉर्ड 2019 मिला है। इस फिल्म को रयाक्ता जहताबची और मैलिसा बर्टन ने निर्देशित किया है।

वहीं, ईरानी-अमेरिकन फिल्म डायरेक्टर रयाक्ता ने ऑस्कर जीतने पर कहा कि ‘उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि पीरियड्स पर बनी फिल्म ने ऑस्कर जीता है।’ दिल्ली से बेहद करीब उत्तर प्रदेश के हापड़ जिले के गांव काठीखेड़ा निवासी स्नेह को लेकर बनाई गई ‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ फिल्म पिछले दिनों ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेटेड हुई थी। इसे ऑस्कर्स के शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में दुनियाभर की नौ और शॉर्ट डॉक्यूमेंट्रीज़ के साथ नॉमिनेट किया गया था। समाज में पीरि‍यड्स के टैबू पर बनी यह डॉक्यूमेंट्री ने बेस्ट डॉक्यूमेंटी अवॉर्ड में ऑस्कर जीत लिया है|

ऑस्कर अवॉर्ड जीतने पर गुनीत मोंगा ने भी ट्वीट किया- ‘हम जीत गए। इस धरती पर मौजूद हर लड़की यह जान ले कि वह देवी है… हमने @Sikhya को पहचान दिलाई है।’

यह फिल्म नारी स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर बनी है। सहेलियों संग मिलकर स्नेह ने गांव में ही सेनेटरी पैड बनाने का उद्योग लगाया था।

फिल्म के ऑस्कर अवॉर्ड पाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट किया है- ‘हापुड़ की लड़कियों की मेहनत और सफलता का डंका अब ऑस्कर्स तक सुनाई पड़ रहा है। हापुड़ की परिश्रमी लड़कियों को और इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।’21 फरवरी को ऑस्कर अवार्ड को पाने के लिए पूरी टीम खुशी के आंसूओं संग दिल्ली एयरपोर्ट से अमेरिका के लिए रवाना हुई थी।

अवार्ड के लिए पांच फिल्में चुनी गई थी, जिसमें पूरे भारत से यह एक मात्र फिल्म थी। पहले ही कहा जा रहा था कि ऑस्कर की नामित लघु वृत्त चित्र फ़िल्मों में भारत और भारतीय बाल महिलाओं से जुड़ी ‘पीरियड एंड ऑफ सेंटेन्स’ को सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्त फ़िल्म का अवार्ड मिल सकता है।

इन फिल्मों से था मुकाबला

1.Black Sheep (ब्लैकशिप)
2.End Game (एंड गेम)
3.Lifeboat (लाइफ बोट)
4.A Night at the Garden (अ नाइट एट द गार्डन)

यहां पर बता दें कि यह फिल्म हापुड़ जिले के गांव काठी खेड़ा की एक लड़की पर फिल्माई गई है। यह लड़की सहेलियों संग मिलकर अपने ही गांव में सबला महिला उद्योग समिति में सेनेटरी पैड बनाती है। यह पैड गांव की महिलाओं के साथ नारी सशक्तीकरण के लिए काम कर रही संस्था एक्शन इंडिया को भी सप्लाई किया जाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि जब एक महिला से पीरियड के बारे में पूछा गया तो वह कहती है मैं जानती हूं पर बताने में मुझे शर्म आती है। जब यही बात स्कूल के लड़कों से पूछी गई तो उसने कहा कि यह पीरियड क्या है? यह तो स्कूली की घंटी बजती है, उसे पीरियड कहते हैं।

साहस नहीं जुटाती तो फिल्म में कैसे करती काम
साधारण छोटे किसान राजेंद्र की 22 साल की बेटी स्नेह ने बचपन से ही पुलिस में भर्ती होने का ख्याब संजोया था। आज तक वह हापुड़ से आगे दूसरे शहर भी नहीं गई, लेकिन अब उसकी फिल्म ने ऑस्कर जीता है। स्नेह के लिए तो पिता और परिवार ही सब कुछ हैं। स्नेह कहती हैं कि उसने बीए तक पढ़ाई हापुड़ के एकेपी कॉलेज से की। मैं तो पुलिस में भर्ती होने की तैयारी में लगी थी। इसी बीच मेरी रिश्ते की भाभी सुमन जो ‘एक्शन इंडिया’ संस्था के लिए काम करती थीं, बताया कि संस्था गांव में सेनेटरी पैड बनाने की मशीन लगाने वाली है। क्या तुम इसमें काम कर पाओगी, तो मैंने सोचा कि पैसे कमाकर अपनी कोचिंग की फीस इकट्ठा कर लूंगी। मां उर्मिला से बात की तो उन्होंने हामी भर दी। पिता को बताया गया कि संस्था बच्चों के डायपर बनाने का काम करती है।

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