गोपी को पेड़ लगाने का काम मिला जिसमें बकस्वाहा से सागर मार्ग पर लगाये गए. कभी लोग जिसे कहते थे पागल आज करते है उनके जुनून को सलाम, ट्री-मैन आदिवासी जिन्होंने अकेले लगा दिए 2200 से ज्यादा पेड़
जिले के बकस्वाहा में एक मजदूर ने 40 साल की मेहनत से फलदार 2200 पेड लगाकर पर्यावरण का संदेश दिया है. उनके इसी कार्य के लिये यहां के लोग गोपी आदिवासी की जगह ट्री मैन (tree man) के नाम से जानते है.
2200 पेड़ लगाए
मंझगुवावादन गांव के गोपी आदिवासी जो पीडब्ल्यूडी में महज श्रमिक मजदूर थे. उनके परिवार में पत्नी श्यामरानी उनकी 4 बेटियां और 2 बेटे है. गोपी को पेड़ लगाने का काम मिला जिसमें बकस्वाहा से सागर मार्ग पर लगाये गए. जो करीब 5 किलोमीटर में 2200 पेड़ लगाए गए थे.
अब दिखती है हरियाली
बाद में कुछ पेड़ रोड के चौड़ीकरण के नाम पर काट दिए गए. जब हर जगह पर गर्मियों में सूखा नजर आता है. तेज धूप होती है तो बकस्वाहा से सागर जाने वाले मार्ग पर हरियाली दिखती है.
पहले लोगों ने कहा पागल
ये हरियाली गोपी आदिवासी के कई साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है. यहां के सभी पेड़ गोपी के लगाए हुए हैं. जब उन्होंने पेड़ लगाने की शुरुआत की तो गोपी आदिवासी के साथ वही हुआ जो हर जुनूनी व्यक्ति के साथ होता है. गांव में लोगों ने उन्हें पागल कहना शुरू कर दिया था. अब हर कोई उनके इस काम की सराहना करता है और उनको सलाम करता है.



