* कोविड-19 एवं क्षेत्रीय भाषाओं में मुहैया की विषमताएं :
भारत सरकार सारी सूचनाएं अंग्रेजी में मुहैया करवा रही हैं वहीं विदेशी हांगकांग सरकार सारी सूचनाएं हिंदी में भी मुहैया करवा रही हैं
अंग्रेजी दा यह चयनित करेंगे अंग्रेजी बोलने वाले तक सारी बातें पहुंचे, भारतीय भाषाएं बोलने और समझने वाले तक यह सूचना कई चरणों के बाद पहुंचे. ताकि वह अपने आप को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करने में पूर्णत विफल हो जाए . आज तक देश की आजादी के 70 साल बाद भी यह सरकारें विफल रही .सारी सरकारी सूचनाओं को अपनी जन भाषाओं में मुहैया करवाने में लोकतंत्र की सबसे बड़ी विफलता है
अब तो जनतंत्र को यह सोचना पड़ेगा हमें कैसा गणतंत्र चाहिए . अब तो ऐसा लगता है कि जनता रास्ता खाली करो सरकार आती है वह आपको अंग्रेजी में स्वस्थ होना सिखाती है. यह कैसी विडंबना है की जन सामान्य सूचना के अभाव में दर-दर को तो कभी व्हाट्सएप ,तो कभी फेसबुक, तो कभी मैसेज, तो कभी इंस्टाग्राम तो कभी टिक टॉक ,कभी टेलीग्राम पर भटक रहा है. यह दुर्भाग्य है आज की युवा पीढ़ी का डिजिटल होने का सौभाग्य है .विश्व का गढ़ है सूचना प्रौद्योगिकी में फिर भी हमारा जनतंत्र और लोकतंत्र विफल हो गया सारी सूचनाओं को इन माध्यमों के जरिए मुहैया करवाने में.
केंद्र सरकार कोविड-19 बारे में भारतीय भाषाओं में जन सूचनाएं उपलब्ध कराने के बारे में पूर्णता विफल साबित हो रही है . केंद्र सरकार की किसी भी वेबसाइट पर संविधान द्वारा सूचित भाषाओं में सूचना उपलब्ध नहीं है .
यह जनसामान्य में अधिकारिक सूचना की कमी की ओर एवं सरकार की गैर जिम्मेदाराना व्यवहार को इंगित करता है. 19,500 से अधिक भाषाएँ या बोलियाँ भारत में मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं, सर्वे में पाया गया था कि 1981 की जनगणना में सूचीबद्ध 114 भाषाओं में, सर्वेक्षण में शामिल 96 भाषाओं में से लिखित अभिव्यक्ति तरीके पाए गए .यह 121 भाषाएँ हैं जो भारत में 10,000 या अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं, जिनकी जनसंख्या 121 करोड़ है। हालांकि, देश में 96.71 प्रतिशत आबादी के पास अपनी मातृभाषा के रूप में 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक है।
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को जन सूचना क्षेत्रीय बोली एवं क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए एवं जनसंपर्क के सारे माध्यम से उनको प्रचार प्रसार करना चाहिए.- राजेश पाराशर
(RP31M2020VNSDLSMDLSCHWH1153AM)




