Tuesday, July 14, 2026
Google search engine
Homeखेल जगतcategorizedमहामृत्युंजय मंत्र स्वर और गहरी सांस के साथ जपने से शरीर पर...

महामृत्युंजय मंत्र स्वर और गहरी सांस के साथ जपने से शरीर पर होता है बहुत सकारात्मक प्रभाव

महामृत्युंजय मंत्र स्वर और गहरी सांस के साथ जपने से शरीर पर होता है बहुत सकारात्मक प्रभाव
भगवान शिव को मृत्यु का देवता भी कहा जाता है। उनका एक नाम महाकाल भी है। इस कारण भगवान शिव को शमशान वासी भी कहा गया है। शिवपुराण सहित कई ग्रंथों में महामृत्युंजय मंत्र के बारे में लिखा गया है। अगर शिव को प्रसन्न करना है तो इस मंत्र का जाप सबसे अच्छा है। अगर कोई बहुत बीमार हो, घायल हो तो उनकी रक्षा के लिए इस मंत्र का संकल्प के साथ जाप बहुत असरदार माना गया है। ग्रंथों का मानना है कि इससे अकाल मृत्यु के योग तक टाले जा सकते हैं। ये कई लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय है कि इस मंत्र में ऐसा क्या है जो ये इतना असरकारक माना जाता है।

वैज्ञानिक कारण
इसके पीछे सिर्फ धर्म नहीं है, इसके पीछे पूरा स्वर सिद्धांत है। इसे संगीत का विज्ञान भी कहा जाता है। महामृत्युंजय मंत्र की शुरुआत ऊँ अक्षर से होती है।

इसका लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ उच्चारण किया जाता है। इसी तरह पूरे मंत्र को पढ़ा जाता है। बार-बार दोहराया जाता है। इससे शरीर में मौजूद सूर्य और चंद्र नाड़ियों में कंपन उत्पन्न होता है।
हमारे शरीर में मौजूद सप्तचक्रों के आसपास एनर्जी का संचार होता है। ये संचार ही मंत्र पढ़ने वाले और सुनने वाले के शरीर पर भी होता है। नाड़ियों और चक्रों में जो ऊर्जा का संचार होता है।
इन चक्रों के कंपन से शरीर में शक्ति आती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ जाप करने से बीमारियों से जल्दी मुक्ति मिलती है।
इस तरह किया जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप
रोज रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करने से अकाल मृत्यु (असमय मौत) का डर दूर होता है। साथ ही कुंडली के दूसरे बुरे रोग भी शांत होते हैं, इसके अलावा पांच तरह के सुख भी इस मंत्र के जाप से मिलते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ त्र्यंबकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्द्धनम्,
ऊर्वारुकमिव बन्धनात, मृत्योर्मुक्षियमामृतात्।।

कुंडली के इन दोषों का करता है नाश
महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से हमारी कुंडली के मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग, दुःस्वप्न, गर्भनाश, संतानबाधा कई दोषों का नाश होता है।

महामृत्युजंय मंत्र का जप करने से होती है शुभ फल की प्राप्ति
दीर्घायु (लम्बी आयु) – जिस भी मनुष्य को लंबी उम्र पाने की इच्छा हो, उसे नियमित रूप से महामृत्युजंय मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र के प्रभाव से मनुष्य का अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है, इसका का जप करने वाले को लंबी उम्र मिलती है।

आरोग्य प्राप्ति – यह मंत्र मनुष्य न सिर्फ निर्भय बनता है बल्कि उसकी बीमारियों का भी नाश करता है। भगवान शिव को मृत्यु का देवता भी कहा जाता है। इस मंत्र के जप से रोगों का नाश होता है और मनुष्य निरोगी बनता है।
सम्पत्ति की प्राप्ति – जिस भी व्यक्ति को धन-सम्पत्ति पाने की इच्छा हो, उसे महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना चाहिए। इस मंत्र के पाठ से भगवान शिव हमेशा प्रसन्न रहते हैं और मनुष्य को कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
यश (सम्मान) की प्राप्ति – इस मंत्र का जप करने से मनुष्य को समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है। सम्मान की चाह रखने वाले मनुष्य को प्रतिदिन महामृत्युजंय मंत्र का जप करना चाहिए।
संतान की प्राप्ति – महामृत्युजंय मंत्र का जप करने से भगवान शिव की कृपा हमेशा बनी रहती है और हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंत्र का रोज जाप करने पर संतान की प्राप्ति होती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments