कोरोना वायरस का श्रमिक हितों पर कुठाराघात
दुनिया के सबसे बड़े कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान, 21 दिनों के तालाबंदी की घोषणा करने के बाद हजारों लोगों को,अपने घर गांवों तक प्रवासी श्रमिकों के पलायन . आज की यह जो परिस्थिति है यह पूरी की पूरी व्यवस्था की पोल खोल देती है.
मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूं की इनमें किन संस्थाओं की जिम्मेवारी तय होती है. सबसे पहले दिल्ली के समाज का चरित्र पूर्णता उभर के आ जाता है जोकि मूलत स्वार्थ, शोषण, कूनीति, पर आधारित है . सर्वप्रथम सभी फैक्ट्री मालिकों को अपने अपने क्षेत्र के लेबर इंस्पेक्टर को सूचित करना चाहिए था, एवं क्षेत्र के लेबर कमिश्नर को अपने क्षेत्र के सभी फैक्ट्री मालिकों को विश्वास में लेकर श्रमिकों के लिए आवास भोजन स्वास्थ्य की नीति का निर्माण करना चाहिए था साथ ही साथ उसके क्रियान्वयन में भी उतनी ही तत्परता दिखानी चाहिए थी जितना लॉक डाउन दिखाने में दिखाई .क्षेत्र से संबंधित राजनेताओं ,विधायक, सभासद एवं मोहल्ला समिति, और समितियां हैं वह सब की सब गैर जिम्मेदाराना है.
उन सभी के जहां जहां पर यह काम करते थे श्रमिक उनके सभी फैक्ट्रियों मालिकों पर देशद्रोह का मुकदमा कायम हो और उनकी संपत्ति एवं स्थान जप्त कर के इन श्रमिकों को दे दिया जाए तत्काल प्रभाव से ताकि वह वहां पर रह सके और अपना जीवन निर्वाह कर सकें. क्योंकि इनमें से अधिकतर मजदूरों का कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं होगा जैसे कि लेबर आईडी कार्ड सामाजिक सुरक्षा, इंश्योरेंस, स्वास्थ चिकित्सा के लाभ से सब वंचित होंगे इसके लिए लेबर कमिश्नर वह फैक्ट्री का मालिक उस क्षेत्र का राजस्व अधिकारी जिम्मेवार है इन सबको राष्ट्रद्रोह दो के लिए जिम्मेवार माना जाए. क्योंकि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है राष्ट्र के खिलाफ .
आज फिर यह साबित हो गया की जीवन की डोर सिर्फ ताकतवर लोगों के साथ हैं हर कमजोर को मरना ही होता है राजा चाहे कोई भी हो क्या मानवता , मानवीय सिद्धांत आज कहीं फेल नहीं हो गए आज मानव , पशु से भी बदतर हो गया है इससे तो अच्छे उन बंदरों और कुत्तों का झुंड अच्छा होता है जिसमें से अगर एक भी गिर जाए तो सब के सब खड़े हो जाते हैं लेकिन यहां एक पूरा वर्ग सड़क पर है एक अरब से ज्यादा की पॉपुलेशन आबादी इस देश की सो रही है सो जाओ 10000 साल पुरानी वाली सभ्यता वालों तुम अब सो जाओ .
इतिहास में तुम सो जाओ, ऐसा सो जाओ, इतिहास तुम्हें कुंभकरण की औलाद के तौर पर याद रखेगा , सब के सब रावण हो .(RP29M20VNDL20)
लेखक -राजेश पाराशर
फोटोग्राफर – शिव जी



