समुद्र की सतह से लगभग पांच हजार फुट की ऊंचाई पर होने वाला हरसिंगार का पुष्प न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है। कपड़ों की रंगाई से लेकर सौंदर्य प्रसाधन में भी हरसिंगार का उपयोग होता है। लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में उत्तराखंड में हरसिंगार के विकास के लिए शोध चल रहा है।यूं तो हरसिंगार को नाइट जासमीन, परिजात, सेफालिका, रजनीकसा के नाम से भी जाना जाता है लेकिन इसका वनस्पतिक नाम निकटैनथस अरबोर ट्रिस-ट्रिस है। भारत के हिमालय के उप पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा यह हिमाचल प्रदेश से नेपाल, पूर्वी बंगाल, असम के अलावा दक्षिण और मध्य भारत में पाया जाता है। दो से आठ फुट तक लंबे इसके पौधे में अगस्त से अक्तूबर तक फूल खिलते हैं और नवंबर से मार्च तक बीज बनता है। हरसिंगार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका फूल सूर्यास्त के बाद खिलता है।
निकटवर्ती निगलाट स्थित राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संस्थान ब्यूरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. केएस नेगी के मुताबिक इसकी पत्तियों के रस से सायटिका और गठिया जैसे रोग भी ठीक होते हैं जबकि पुष्प के नारंगी भाग से कपड़ों के लिए रंग तैयार किया जाता है। कहा जाता है कि यदि मधुमक्खी इसके पेड़ में छत्ता लगाए तो उससे निकलने वाला शहद खासा गुणकारी होता है। इसके फूल से निकलने वाले तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने के लिए किया जाता है। डा. नेगी ने बताया कि उत्तराखंड में हरसिंगार के विकास के लिए लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में शोध कार्य चल रहा है।
औषधीय गुणों से भरपूर है हरसिंगार का फूल…
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