पीरियड्स में सैनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. सैनेटरी पै़ड्स के इस्तेमाल से महिलाओं को होने वाले गुप्त रोग से बचा जा सकता है. हमारे देश में आज भी कई ऐसी महिलाएं हैं, जो सैनेटरी पैड्स की जगह कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, जो हेल्थ के लिए काफी खराब साबित होता है.
बहुत ही महिलाओं का ये कहना है कि सैनेटरी पैड्स इतना ज्यादा महंगा होता हैं कि हम उसे खरीद नहीं सकते. उन्हीं महिलाओं के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( IIT) के दो स्टूडेंट्स ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे आप एक बार पैड का इस्तेमाल कर दोबारा उसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
इन छात्रों ने सेनेटरी पैड्स को दोबारा इस्तेमाल के लिए एक डिवाइस तैयार किया है. इस डिवाइस के जरिए आप खराब हो चुके सेनेटरी पैड्स का दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके साथ ही डिवाइस बायोमेडिकल कूड़े से निपटने का भी एक अच्छा तरीका है. सेनेटरी पैड्स को फिर से इस्तेमाल योग्य बनाने वाले इस डिवाइस का नाम ‘क्लींज राइट’ दिया गया है.
इस डिवाइस को आईआईटी मुंबई और गोवा के छात्रों ने तैयार किया है. मार्केट में इस डिवाइस की कीमत सिर्फ 1500 रुपये है. इस रिवाइस के जरिए ना आप पैसों की बचत कर सकते हैं, बल्कि इससे सैनेटरी पैड्स की वजह से बढ़ रही गंदगी को भी कम कर सकते हैं. आज के दौर में ये डिवाइस वरदान साबित हो सकता है.
आईआईटी-बॉम्बे की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा ऐश्वर्या ने डिवाइस के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “पीरियड्स और इससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में आई जागरुकता के बाद महिलाएं अब महीने के उन दिनों के दौरान कपड़े की जगह सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं.”
मालूम हो कि सेनेटरी पैड्स का निर्माण नॉन-बायोग्रेडेबल प्लास्टिक से किय़ा जाता है. पैड्स का इस्तेमाल होने के बाद ये बायोमेडिकल कचरे का रूप ले लेता है.
इस बारे में जानकारी देते हुए छात्रों ने कहा, “एक औरत की जिंदगी में पीरियड्स के दौरान लगभग 125 kg तक नॉन बायोग्रेडेबल कचरा बनता है और मिट्टी में इस पैड को डीकम्पोस्ट होने में लगभग 500 से 800 सालों का समय लगता है. इस उपकरण की सबसे ख़ास बात यह है कि इन्हें साफ़ करने के लिए बिजली का इस्तेमाल नहीं करना होता है.”



