Tuesday, July 14, 2026
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योग और स्वास्थ्य..

अंग्रेजी में ‘health’ शब्द की उत्पत्ति ’whole’ से हुई है। हिंदी में भी स्वास्थ्य को संपूर्णता के संदर्भ में देखा जाता है। अगर कोई अपने भीतर संपूर्णता का अनुभव करना चाहता है तो ये आवश्यक है कि शरीर और दिमाग के अलावा उसकी ऊर्जा भी एक निश्चित तीव्रता के साथ सक्रिय रहे। अगर आपकी ऊर्जा अपने समुचित संतुलन में है और पूरी तरह से प्रवाहित हो रही है तो आप शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों ही तरह से पूरे स्वस्थ रहेंगे।

आधुनिक चिकित्सा का फोकस शरीर का रसायन शास्त्र है। अपने शरीर की हर समस्या के लिए आप कोई ना कोई दवा लेते हैं-ताकि कुछ राहत मिले। लेकिन ये दवा है तो एक रसायन ही। ये रसायन आपकी किसी विशेष परेशानी को दूर करता है, लेकिन इसका एक साइड-इफेक्ट भी होता है। इस साइड इफेक्ट के लिए भी एक प्रतिरोधक औषधि है जिसके बाद प्रतिरोधक दवाएं लेने का एक अंतहीन सिलसिला बन जाता है।

वहीं योग स्वास्थ्य की व्याख्या मूलतत्व से जोड़कर करता है। आपके शरीर के रसायन के साथ जो कुछ भी हो रहा होता है वो आपके अंदर के ऊर्जा प्रवाह से नियंत्रित होता है। एक सही योगाभ्यास का मतलब है अपने एनर्जी सिस्टम की जड़ों में जाना। इससे आपकी ऊर्जा कुछ इस तरह सक्रिय और स्थापित होती है जिससे शरीर और दिमाग अपने आप पूरी क्षमता के साथ क्रियाशील हो जाते हैं।

यहां संक्रामक यानी तेजी में फैलने वाली बीमारियों और पुरानी बीमारियों के अंतर को समझना भी महत्वपूर्ण है। संक्रमण शरीर पर एक बाहरी आक्रमण है-जिसके लिए आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसे ध्यान(Meditation) से दूर करने की ना सोचें! लेकिन धरती पर 70 फीसदी बीमारियां पुरानी होती हैं..जो आपके अंदर से प्रकट होती हैं। इन बीमारियों की मूल वजह हमेशा अपने भीतर मौजूद होती है। अगर लोग अपने सिस्टम को संतुलित और सक्रिय करने के लिए कुछ सरल अभ्यास अपनाएं तो वो स्वयं को पुरानी बीमारियों से मुक्त कर सकते हैं।

आप अपने शरीर को देखिए, इसमें जन्म के समय और आज के समय में कितना अंतर है। अपनी मां के गर्भ में आपकी शुरुआत सिर्फ दो कोशिकाओं से होती है और फिर इस दुनिया में आपका आगमन एक शिशु के रूप में होता है। आज आपका शरीर पूरी तरह से बड़ा हो चुका है। ये सब कैसे संभव हुआ? किसी ने आपके शरीर को बाहर से खींचकर तो बड़ा नहीं किया?  सृष्टि का आधार यही है, निर्माता आपके अंदर होता है। शरीर का निर्माण आपके स्वयं के अंदर से होता  है।

अगर आपको मरम्मत का काम करवाना हो, तो आप निर्माता के पास जाना चाहेंगे या स्थानीय मैकेनिक के पास? अगर निर्माता की पहचान आपने खो दी है तो आप स्थानीय मैकेनिक के पास जाते हैं। योग अपने भीतरी क्षेत्र की खोज है जिससे हम अपने सृजन के स्त्रोत को ढूंढ़ते हैं। जब आप निर्माता को जानते हों और उसके पास आपकी पहुंच हो, तो आप निश्चित रूप से निर्माता के पास ही जाना चाहेंगे। योग का मतलब भी यही है- निर्माता के पास वापस जाना। अगर आप सृजन के स्त्रोत को क्रियाशील होने देते हैं, तो जो कुछ भी तय किया जाना चाहिए वह आसानी से होगा।

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