Tuesday, July 14, 2026
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होलोचेन तकनीक नहीं पहुंचने देगी गूगल-फेसबुक तक यूजर का डाटा….

होलोचेन तकनीक गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को बड़ी चुनौती देने जा रही है। इस नई तकनीक से यूजर का डाटा उसी के पास सुरक्षित रह सकेगा और कंपनियों तक नहीं पहुंचेगा। अभी स्मार्टफोन में किए जाने वाले किसी भी काम का डाटा सीधे गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों के पास पहुंच जाता है। लेकिन होलोचेन ऐसा नहीं होने देगी।

दरअसल 1990 के दशक में ब्रिटेन के टिम बर्नर्स ली के वर्ल्ड वाइड वेब को टक्कर देने के लिए नई तकनीक बाजार में आ रही है। इसे होलोचेन का नाम दिया गया है। इसके डिजाइनरों का दावा है कि यह तकनीक डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू के बाद से बनाई गई सबसे अहम तकनीक है जो यूजर को ऑनलाइन गोपनीयता बनाए रखने में मदद करती है। इसके संस्थापक और अमेरिका के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्थर ब्रॉक व एरिक हैरिस ब्राउन ने कहा कि यह तकनीक हमारी कल्पना से भी ज्यादा निर्णायक साबित होगी।

होलोचेन तकनीक से न सिर्फ सर्च इंजन, ईमेल, मैसेंजर या दूसरे तरह के एप बनाए जा सकते हैं बल्कि इस तकनीक से बने एप से कॉर्पोरेट सर्वर से जुड़ने की जरूरत नहीं होगी। इसका सारा डाटा यूजर के कंप्यूटर में ही स्टोर होता है। इस तरह से कॉर्पोरेट सर्वर चलाने वाली बड़ी कंपनियों के पास यूजर का डाटा पहुंचता ही नहीं है। होलोचेन टीम पर्सनल डाटा को कारपोरेट सर्वर तक न पहुंचाकर यूजर्स को उसकी जानकारी का नियंत्रण देना चाह रही है। ब्रोक कहते हैं, ‘होलोचेन में यूजर्स एजेंट है और इसमें यूजर्स ही फैसला लेते हैं कि डाटा कहां जाएगा और किसे दिखेगा।’

क्या है होलोचेन तकनीक

डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू प्रोटोकॉल की तरह ही होलोचेन तकनीक भी कंप्यूटर को आपसी संपर्क करने के लिए तैयार करती है। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू बड़ी कारपोरेट कंपनियों के सर्वर पर चलता है, जबकि होलोचेन तकनीक को पूरी तरह से पर्सनल कंप्यूटर और स्मार्टफोन के ही नेटवर्क पर चलाने के लिए बनाया गया है। यानी होलोचेन में डाटा स्टोरेज किसी बड़े कारपोरेट सर्वर में न होकर नेटवर्क में जुड़े स्मार्टफोन और कंप्यूटरों में होता है। इसके उलट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू के तहत यूजर का स्मार्टफोन या कंप्यूटर फेसबुक या गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के सर्वर से जुड़ने के लिए रिक्वेस्ट भेजता है और उन्हीं सर्वरों से डाटा का आदान-प्रदान करता है।

नई तकनीक होगी सस्ती
होलोचेन के डिजाइनरों का दावा है कि उन्होंने इन कमियों के बिना तकनीक को डिजाइन करने में सफलता पाई है। डिजाइनर ब्रॉक के मुताबिक, ब्लॉकचेन के मुकाबले होलोचेन में होने वाली गतिविधियां समय और ऊर्जा के हिसाब से 10 हजार गुना सस्ती और कारगर होंगी। होलोचेन के डिजाइनरों की टीम ने 2018 की शुरुआत में आईसीओ (इनिशियल कॉइन ऑफरिंग) लॉन्च किया था और इसकी मदद से लाखों डॉलर जुटा कर होलोचेन का बीटा वर्जन भी लॉन्च किया। माना जा रहा है कि जब पहला कारगर एप बन जाएगा, तब होलोचेन की सफलता को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।

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