ट्रंप के सोशल मीडिया समिट में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोगों की भरमार है. इनमें से कई लोगों पर इंटरनेट पर झूठ फैलाने के आरोप हैं
सोशल मीडिया आज के वक्त की जरूरत है. दुनियाभर में इसकी पॉपुलैरिटी इतनी है कि लोग अपनी जिंदगी का अच्छा-खासा वक्त सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं. ये पोस्ट लाइक, कमेंट्स और ट्वीट-रिट्वीट की दुनिया है. सोशल मीडिया की दुनिया फैली तो इसमें ट्रोल्स और मीम बनाने वाले भी आ गए. इसकी ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि गुरुवार को दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया समिट बुलाई है. व्हाइट हाउस में होने वाली इस समिट में सोशल मीडिया के कुछ गिने-चुने लोगों को बुलाया गया है. लेकिन हैरानी की बात है कि इससे फेसबुक और ट्विटर को दूर रखा गया है.
क्या है सोशल मीडिया समिट और फेसबुक और ट्विटर को दूर क्यों रखा?
सोशल मीडिया में बढ़ रही चुनौतियों से निपटने के लिए सोशल मीडिया समिट बुलाई गई है. ट्रंप खुद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और अमेरिका के नीतिगत फैसलों से लेकर अपने विचार सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर शेयर करते रहते हैं. हालांकि फेसबुक और ट्विटर को समिट में न बुलाए जाने के पीछे ट्रंप की इनसे नाराजगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि सोशल मीडिया के ये दोनों प्लेटफॉर्म्स रिपब्लिकन के विचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं. ट्विटर के सीईओ जैक डोर्से के साथ हुई एक बैठक में ट्रंप ने उनसे पूछा था कि उनके फॉलोवर्स की संख्या लगातार कम कैसे हो रही है.
सोशल मीडिया समिट में बुलाए गए हैं दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग
राष्ट्रपति ट्रंप की सोशल मीडिया समिट में दक्षिणपंथी विचारधारा से सोशल मीडिया स्टार्स की मौजूदगी होगी. सीएनएन के मुताबिक फोरम में एंटी कंजरवेटिव मीडिया बॉयस पर विचार रखा जाएगा. लेकिन इसके पीछे की असलियत कुछ और ही है. समिट में कुछ ऐसे लोग हिस्सा ले रहे हैं जो इंटरनेट की दुनिया के मंझे हुए दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाड़ी हैं. इनमें से कई लोगों ने सोशल मीडिया पर साजिश की थ्योरी, झूठ और गलत जानकारी फैलाई है.
व्हाइट हाउस ने समिट में शामिल होने वाले गेस्ट की लिस्ट छुपाने की कोशिश की है. लेकिन सीएनएन को कुछ मेहमानों की जानकारी हाथ लगी है. इसमें बिल मिशेल जैसे शख्स शामिल होंगे, जिन्होंने अतिवादी कुनन साजिश (QAnon conspiracy ) की थ्योरी ट्विटर पर दी थी. इस थ्योरी के मुताबिक कुछ लोग बहुत गहराई से यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.
इसमें एक कार्पे डॉनटम का नाम शामिल है. इनकी पहचान एक ऐसे ट्रोल्स की है, जिन्होंने फर्जी मीडिया ऑर्गेनाइजेशन इंफोवार्स के जरिये एंटी मीडिया मीम बनाई और एक प्रतियोगिता में जीत भी हासिल की. एक नाम अली एलेक्जेंडर का है, जो एक एक्टिविस्ट हैं. कमला हैरिस भी समिट में शामिल होंगी, जिन्होंने पहले डेमोक्रेटिक डेबिट में कहा था कि वो एक अमेरिकन ब्लैक नहीं हैं.
इसमें एक पत्रकार जेम्स ओ’केफी का नाम भी शामिल है. जिन्होंने वाशिंगटन पोस्ट में अपने सोर्स के जरिये एक खबर प्लांट करवाई थी. इसमें कहा गया था कि एक रिपब्लिकन सीनेट रॉय मूर ने किशोरावस्था में उन्हें गर्भवती कर दिया था. गेस्ट लिस्ट में एक नाम चार्ली किर्क का है, जिन्होंने दक्षिणपंथी छात्र संगठन बनाया है. सोशल मीडिया पर इस संगठन ने कई बार गलत जानकारी फैलाई है. एक नाम बेनी जॉनसन का है, जो पत्रकार से एक्टिविस्ट बने हैं. जिन्हें बजफीड से निकाल बाहर किया गया था, क्योंकि उन्होंने फर्जीवाड़ा करके कंपनी का नाम खराब किया था.
दुनियाभर में हो रही है समिट की आलोचना
इन मेहमानों के शामिल होने की वजह से दुनियाभर में ट्रंप की आलोचना हो रही है. व्हाइट हाउस से ये पूछने पर कि गेस्ट में और कौन-कौन नाम हैं. व्हाइट हाउस ने जानकारी देने में आनाकानी की. गेस्ट लिस्ट में एक नाम कार्टूनिस्ट बेन गैरिसन का नाम भी है. इनके यहूदियों के खिलाफ एक कार्टून की दुनियाभर में आलोचना हुई थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप के इस समिट की आलोचना करते हुए लिखा है कि इंटरनेट पर ट्रोलिंग कोई बेकार का काम नहीं रह गया है. घटिया जोक्स और मीम्स बनाकर, कुछ बेकार से ट्वीट करके बड़ी संख्या में रिट्वीट हासिल करके आप व्हाइट हाउस तक पहुंच सकते हैं. व्हाइट हाउस इंटरनेट ट्रोल्स के लिए रेड कार्पेट बिछा रहा है.



