गुड़गांव में असाही इंडिया ग्लास फैक्टरी के हेडक्वार्टर के सामने 15 दिनों से दो दर्जन मज़दूर धरना दे रहे हैं।
कंपनी के 28 मज़दूर सुबह नौ बजे से पांच बजे तक गेट के सामने इस उम्मीद में खड़े रहते हैं कि शायद उनकी बात सुन ली जाए।
ये मज़दूर अपनी मांगों को लेकर 2,000 किलोमीटर दूर चेन्नई से गुड़गांव आए हुए हैं।
साल भर पहले कंपनी के 10 साल पूरा होने पर गिफ्ट की मांग करने पर इन्हें जुलाई 2017 में सस्पेंड कर दिया गया।
इंटर्नल जांच हुई और सितम्बर 2018 को इन सभी को टर्मिनेट कर दिया गया।
इन्हीं में से एक कामेश ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि मैनेजमेंट ने सस्पेंशन के दौरान कहा था कि ये मामूली जांच है, जिसके बाद उन्हें वापस काम पर ले लिया जाएगा।
15 दिन से धरना जारी
मज़दूरों ने अपील की थी, मैनेजमेंट ने निकाल बाहर किया
वो कहते हैं, “मैनेजमेंट के इस वादे पर सभी आरोपित मज़दूरों ने जांच में पूरा सहयोग किया और इसे तय समय में समाप्त किया।”
कामेश के अनुसार, लेकिन इसके बदले में मैनेजमेंट ने उन्हें टर्मिनेट कर दिया।
अब ये सभी मज़दूर गुड़गांव हेडक्वार्टर पर आकर मैनेजिंग डायरेक्टर से मिलने की गुहार लगा रहे हैं।
लेकिन 15 दिनों में उन्हें 10 मिनट के लिए भी एमडी से मुलाक़ात नहीं करने दी गई। जबकि जब भी एमडी आते हैं ये मज़दूर उनके सामने पड़ते हैं।
मज़दूरों की मांग है कि असाही ग्लास फैक्ट्री में उनकी फिर से बहाली की जाए।
असाही फैक्ट्री में 250 मज़दूर परमानेंट हैं और क़रीब 1,000 मज़दूर कैजुअल हैं।
12,50 वर्करों की फैक्ट्री में कोई रजिस्टर्ड यूनियन नहीं है।
लेकिन आपस में ही अनौपचारिक कमेटी बनाकर संगठित होने की कोशिश करते हैं।
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